अजीतपुर दभौरा में एकदिवसीय कृषक गोष्ठी आयोजित, बसंतकालीन गन्ना बुवाई पर दी गई वैज्ञानिक जानकारी

गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र काशीपुर द्वारा गन्ना विकास परिषद काशीपुर परिक्षेत्र के ग्राम अजीतपुर दभौरा में एकदिवसीय कृषक गोष्टी का आयोजन किया गया ! गोष्टी को संबोधित करते हुए गन्ना विभाग के प्रचार एवं जनसंपर्क अधिकारी श्री नीलेश कुमार ने आगामी बसंत कालीन गन्ने की बुवाई जैसे विषय में किसानों को अवगत कराया। निलेश कुमार ने बताया कि गन्ने की कृषि में गहराई तथा दूरी का बहुत महत्व है। अतः किसान बंधु इसका पालन करें। गहराई में गुल खोलकर गन्ने की बुवाई करे। तथा दूरी बनाए रखें ।जिससे कि गन्ने को फैलाव में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि आगामी बसंत कालीन गन्ना बुवाई का समय अब चल रहा है। गन्ना किसान अपनी खेत की अच्छी सी तैयारी कर के ही गन्ने की बुवाई प्रारंभ करें! जिन गन्ना किसानों को वसंत कालीन गन्ना की बुवाई करनी है वह उत्तम बीज का चुनाव करें। । प्रत्येक गन्ना कृषक अपनी खेत का निरीक्षण करें तथा जो भी बीमारी के लक्षण उसमें पाए जाए उसका फोटो लेकर गन्ना शोध केंद्र के वैज्ञानिकों के को प्रेषित करें जिससे कि उसे फोन पर ही तत्काल सहायता उपलब्ध कर दी जाएगी।प्रत्येक कृषक को नवीनतम तकनीक के आधार पर गन्ना की कृषि की जानी चाहिए !हमें अपनी भूमि की जांच करानी चाहिए! भूमि में 16 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं ! अतः जांच करने पर हमें पता चलेगा कि हमारी भूमि में कौन सी तत्व की कमी है तथा उसकी पूर्ति करने से हमारे जमीन की गुणवत्ता में वृद्धि होगी! इस गोष्ठी का उद्देश्य गन्ना कृषकों को उन्नत प्रजाति की गन्ना बीज की जानकारी, गन्ने की फसल में लगने वाली तरह-तरह के बीमारियों तथा उसमें प्रयोग की जाने वाली दवाईयां तथा उनको गन्ने की वैज्ञानिक विधि से कृषि कैसे करें जिससे की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढ़े, गन्ना विभाग की विभिन्न योजनाएं एवं कार्यक्रम, इसकी जानकारी कृषकों को प्रदान करना है ! गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा उन्हें इस संबंध में वार्ता कर इस संबंध में जानकारी प्रदान की जाती है !इस गोष्ठी में प्रतिभाग करते हुए गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वर्तमान में 15023. , 13235, 14201,12226 जैसी उन्नतशील प्रजातियां है जिनको गना कृषकों को प्रोत्साहित करना चाहिए! वर्तमान में 0238 रेड रोड की चपेट में आ गई है अतः कृषक बंधुओ से अनुरोध है कि इस प्रजाति के गन्ने की बुवाई बिल्कुल भी ना करें है! अतः कृषकों को चाहिए कि वह इसका रिप्लेस करें! वैज्ञानिकों द्वारा कीट एवं रोग प्रबंधन के विषय में भी विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इस बैठक में गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक सहित गन्ना विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में प्रगतिशील कृषक मौजूद रहे।