काशीपुर। जीवन में कुछ रिश्ते और उनसे जुड़ी स्मृतियां ऐसी होती हैं, जिन्हें समय बीत जाने के बाद भी भुलाया नहीं जा सकता। हर त्योहार, हर खुशी और जीवन के हर कठिन मोड़ पर अपनों की याद मन को भावुक कर देती है। ऐसी ही पुरानी यादों और जीवन के संघर्षों को शब्दों में पिरोते हुए विधार्थी भैया कविराय ने अपनी भावनाओं को कविता के माध्यम से व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि साथ बिताए हुए पल और जीवन के कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बनने की स्मृतियां आज भी उनके हृदय में जीवंत हैं। जीवन के सफर में जब भी कोई कठिनाई आई, अपनों का साथ और उनका सहयोग हमेशा शक्ति देता रहा। कविता के माध्यम से उन्होंने उन पलों को याद करते हुए कहा हम कैसे भूलें उन पलों को, जो साथ निभाए। हर पर्व पर याद तुम्हारी, हर डग पर साथ तुम्हारा। अगर गिरी राहों में मैं, तब देखती मेरी तरफ। मुझको है उठाने वाला, मैं उठाता दोनों हाथ पकड़कर। तुमने जीवन में कितने कष्ट उठाए, अंत समय भी कष्ट सहे। मैं कैसे भूल पाऊंगा स्मृतियां, कह विधार्थी भैया कविराय तुम जैसा अब कहां। विधार्थी भैया कविराय ने अपनी रचना के माध्यम से जीवन के उन भावनात्मक पलों को याद किया है, जिनमें साथ, संघर्ष, अपनापन और बिछड़ने का दर्द समाहित है। उन्होंने कहा कि समय भले ही आगे बढ़ जाता है, लेकिन अपनों के साथ बिताई गई यादें कभी पुरानी नहीं होतीं और जीवनभर मन में जीवित रहती हैं। यह भावनात्मक रचना उन सभी लोगों के लिए एक संदेश भी है कि अपने जीवन में साथ देने वाले रिश्तों और उनके प्रेम को कभी नहीं भूलना चाहिए। कठिन परिस्थितियों में हाथ थामने वाले अपने लोग ही जीवन की सबसे अनमोल स्मृतियां बन जाते हैं। विधार्थी भैया कविराय स्थान : काशीपुर महानगर, जनपद ऊधमसिंह नगर, उत्तराखंड
शमीम बानो
संपादक – सच्चाई की किरण (पाक्षिक समाचार पत्र)
पता – काशीपुर
